राजधानी रायपुर में विजयादशमी पर्व पूरे धूमधाम और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। डब्ल्यूआरएस कॉलोनी, रावणभांठा और शंकरनगर मैदान में आयोजित भव्य दशहरा उत्सव में राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति रही। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने रावण दहन का दृश्य देखा और रंग-बिरंगी आतिशबाजी का आनंद लिया।

मुख्य समारोह डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में हुआ, जहां जनसमूह की भारी भीड़ उमड़ी। रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन कर अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक प्रस्तुत किया गया।
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि विजयादशमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। “हमें अपने भीतर की बुराइयों को पहचान कर उन्हें समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए,” उन्होंने कहा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा, “दशहरा हमें सिखाता है कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। प्रभु श्रीराम ने यह सिद्ध किया कि धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष आवश्यक है।” उन्होंने छत्तीसगढ़ और प्रभु श्रीराम के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित करते हुए कहा, “यह भूमि माता कौशल्या की जन्मस्थली है और श्रीराम का ननिहाल, इसलिए हम उन्हें ‘भांचा राम’ कहते हैं।”
रावणभांठा और शंकरनगर में भी बड़े स्तर पर दशहरा उत्सव का आयोजन किया गया, जहां मुख्यमंत्री श्री साय विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने रावण दहन के बाद नागरिकों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं और कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर के रावण—काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार—का दहन करना चाहिए।
सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि रायपुर में दशहरा उत्सव की परंपरा 150 वर्षों से भी अधिक पुरानी है और यह आयोजन शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। कार्यक्रम में विधायक श्री सुनील सोनी, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, सीएसआईडीसी अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, धार्मिक संगठन और आम नागरिक शामिल हुए।













