March 25, 2026 11:06 pm

छत्तीसगढ़ विधानसभा में 61 हजार करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित, कृषि-जनजाति विकास और वित्तीय सुधारों पर सरकार का जोर

छत्तीसगढ़ विधानसभा में 61 हजार करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित, कृषि-जनजाति विकास और वित्तीय सुधारों पर सरकार का जोर

रायपुर, 12मार्च 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में कल राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लिए कुल 61 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान मांगें पारित की गईं। इनमें कृषि एवं अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम के विभागों के लिए 50 हजार 537 करोड़ 98 लाख 68 हजार रुपये तथा वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के विभागों के लिए 11 हजार 470 करोड़ 62 लाख 50 हजार रुपये की अनुदान मांगें शामिल हैं। चर्चा के दौरान सरकार ने कृषि विकास, जनजातीय कल्याण, आवास, पर्यावरण संरक्षण, कर सुधार और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता देने की बात कही।

कृषि और जनजातीय विकास के लिए 50 हजार करोड़ से अधिक का प्रावधान

कृषि एवं अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान खेती-किसानी और जनजातीय संस्कृति से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कृषि विभाग को 7075 करोड़ 90 लाख 56 हजार रुपये, पशुपालन विभाग को 656 करोड़ 12 लाख 49 हजार रुपये और मछली पालन विभाग को 110 करोड़ 67 लाख 30 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसी प्रकार आदिम जाति कल्याण के लिए 157 करोड़ 05 लाख 58 हजार रुपये, अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए 39 हजार 568 करोड़ 18 लाख 20 हजार रुपये, जनजातीय क्षेत्रों में सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए 1596 करोड़ 89 लाख रुपये तथा कृषि अनुसंधान और शिक्षा के लिए 447 करोड़ 30 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

मंत्री श्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों का धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही है और धान के अलावा अन्य फसलें लेने वाले किसानों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आदान सहायता दी जा रही है, जिससे दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कम वर्षा वाले क्षेत्रों में मसूर, तिवरा और चना जैसी दलहनी फसलों के उन्नत बीज तैयार किए जा रहे हैं तथा एक फसली जमीन को दो फसली बनाने के अभियान पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पहले ही गरियाबंद, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों को जैविक जिला घोषित किया जा चुका है और अन्य जिलों में भी इस दिशा में काम जारी है। केंद्र सरकार के सहयोग से सरसों, अरहर, मूंग और उड़द की खरीदी समर्थन मूल्य पर करने की व्यवस्था भी की जा रही है।

मंत्री श्री नेताम ने कहा कि राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए एनडीडीबी के साथ एमओयू किया गया है। बजट में हरे चारे के विकास के लिए 7.50 करोड़ रुपये, चिलिंग प्लांट के लिए 50 लाख रुपये, शूकर वितरण के लिए 5 करोड़ रुपये और बकरी वितरण के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि मत्स्य बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में छठे स्थान से बढ़कर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है।

जनजातीय विकास के संबंध में मंत्री ने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में आश्रम-छात्रावासों के भवन निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले दो वर्षों में 167 आश्रम-छात्रावास भवन स्वीकृत किए गए हैं। आगामी वर्ष के बजट में बीजापुर में 500 सीटर आवासीय प्रयास विद्यालय स्थापित करने का प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर क्षेत्र तेज विकास के लिए तैयार है और सरकार “संकल्प” की थीम के साथ राज्य को नई दिशा देने के लिए काम कर रही है।

वित्त मंत्री के विभागों के लिए 11 हजार करोड़ से अधिक का बजट

वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 11 हजार 470 करोड़ 62 लाख 50 हजार रुपये की अनुदान मांगें पारित की गईं। इनमें वित्त विभाग के लिए 9 हजार 630 करोड़ 30 लाख 20 हजार रुपये, आवास एवं पर्यावरण विभाग के लिए 1247 करोड़ रुपये, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के लिए 82 करोड़ 49 लाख 60 हजार रुपये तथा वाणिज्यिक कर विभाग के लिए 510 करोड़ 82 लाख 70 हजार रुपये शामिल हैं।

अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी सुधारों के माध्यम से मजबूत आर्थिक आधार तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए कई सुधार किए गए हैं। लंबे समय से अविक्रित संपत्तियों के विक्रय के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की गई, जिसके तहत अब तक 1410 संपत्तियों का लगभग 210 करोड़ रुपये में विक्रय किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में गृह निर्माण मंडल ने प्रदेश के 27 जिलों में 3069 करोड़ रुपये की लागत से 78 नए प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, जिनमें 16 हजार 782 संपत्तियों के निर्माण का लक्ष्य है।

पर्यावरण निगरानी और तकनीकी सुधार

मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए फ्लाई ऐश के परिवहन की निगरानी हेतु जीपीएस और जियोटैगिंग आधारित इंडस्ट्रियल वेस्ट मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया गया है। इसके माध्यम से अब तक 1 लाख 44 हजार से अधिक ट्रिप की मॉनिटरिंग की जा चुकी है।

राज्य में उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन और प्रदूषण की रियल-टाइम निगरानी के लिए “सीजी निगरानी” पोर्टल विकसित किया गया है, जिससे 124 उद्योगों को जोड़ा गया है।

नवा रायपुर को शिक्षा हब बनाने की पहल

वित्त मंत्री ने बताया कि नवा रायपुर में पहले से ही एचएनएलयू, आईआईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान संचालित हैं। इसके अलावा एनआईएफटी, एनआईईएलआईटी, एनएफएसयू और एनएमआईएमएस जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है, जिससे नवा रायपुर को देश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

जीएसटी 2.0 से आम जनता को राहत

वाणिज्यिक कर विभाग पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि जीएसटी 2.0 के तहत कई वस्तुओं पर कर दरों में कमी की गई है। खाने-पीने की वस्तुओं पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है, कपड़ों पर कर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत तथा सीमेंट पर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे 1000 वर्गफुट का मकान बनाने पर लगभग 1.5 लाख रुपये तक की बचत संभव होगी।

उन्होंने कहा कि मोटरसाइकिल, कार, फ्रिज, टीवी और एसी जैसे उपभोक्ता उत्पादों पर भी जीएसटी घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे टूथपेस्ट, साबुन, साइकिल और डिटर्जेंट पर कर दर 5 प्रतिशत करने से एक मध्यमवर्गीय परिवार को सालाना 25 से 40 हजार रुपये तक की बचत हो सकती है।

पंजीयन प्रक्रिया हुई आसान

वित्त मंत्री ने बताया कि पंजीयन विभाग में व्यापक सुधार किए गए हैं। नागरिकों की सुविधा के लिए रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में रजिस्ट्री कार्यालयों की संख्या बढ़ाई गई है और वीजा सेंटर की तर्ज पर 10 स्मार्ट रजिस्ट्री ऑफिस स्थापित किए जा रहे हैं। पारिवारिक दान पत्र, हकत्याग पत्र और बंटवारा नामे में पंजीयन शुल्क घटाकर 500 रुपये कर दिया गया है।

राज्य की वित्तीय स्थिरता के लिए नई पहल

वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए “छत्तीसगढ़ ग्रोथ एंड स्टेबिलिटी फंड” का गठन किया गया है। वर्तमान में इसमें 50 करोड़ रुपये निवेशित हैं और अगले वर्ष 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। साथ ही भविष्य के पेंशन दायित्वों के बेहतर प्रबंधन के लिए छत्तीसगढ़ पेंशन निधि अधिनियम 2025 लागू कर पेंशन फंड स्थापित किया गया है, जिसमें अभी तक 1121 करोड़ रुपये निवेशित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन, वित्तीय अनुशासन और समावेशी विकास के साथ छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

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