March 26, 2026 2:03 am

नक्सल संगठन को करारा झटका: देवजी ने किया सरेंडर, सीएम साय बोले– नक्सलमुक्त भारत तय; डिप्टी सीएम का दावा– आखिरी चरण में लड़ाई

 

नक्सल संगठन के शीर्ष नेतृत्व से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक संगठन के महासचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ने अपने करीबी सहयोगी सीसीएम संग्राम के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। हालांकि अब तक इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने भी इस संबंध में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है।

देवजी को बसवा राजू के मारे जाने के बाद नक्सल संगठन की कमान सौंपी गई थी। वह वर्तमान में संगठन का सबसे बड़ा और प्रभावशाली चेहरा माना जा रहा था। उस पर छत्तीसगढ़ में करीब डेढ़ करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, जबकि संग्राम पर एक करोड़ रुपये का इनाम था।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस घटनाक्रम को नक्सल विरोधी अभियान की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि शीर्ष नक्सली नेताओं का आत्मसमर्पण इस बात का संकेत है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का नक्सलमुक्त भारत का संकल्प साकार होकर रहेगा।

प्रदेश के डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि उन्हें सूचना मिली है कि देवजी और संग्राम ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिए हैं। इसे उन्होंने बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि नक्सल उन्मूलन की लड़ाई अब अंतिम चरण में है। कर्रेगुट्टा अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 89 आईईडी बरामद किए जा चुके हैं। कुछ अन्य बड़े नामों से भी बातचीत जारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि निर्धारित समयसीमा में नक्सलवाद पर पूरी तरह अंकुश लग जाएगा।

इधर, बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि सीमावर्ती राज्य में वरिष्ठ नक्सली कैडरों के आत्मसमर्पण की खबरों को लेकर चर्चा है, लेकिन नियमानुसार आधिकारिक पुष्टि संबंधित एजेंसियां या राज्य सरकार ही करती हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में नक्सली संगठन लगातार कमजोर हो रहा है और कैडरों के पास हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के अलावा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं बचा है।

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार बस्तर क्षेत्र में अब लगभग 200 सशस्त्र नक्सली ही सक्रिय बचे हैं, जो छोटे समूहों में छिपकर गतिविधियां चला रहे हैं। महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन लगभग खत्म हो चुका है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन में भी नक्सल प्रभाव काफी कम हुआ है।

बताया जा रहा है कि दक्षिण बस्तर के जंगलों में पापाराव अपने साथियों के साथ अलग-अलग टुकड़ियों में मौजूद है, जबकि मिशिर बेसरा के झारखंड में होने की जानकारी मिल रही है।

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