नई दिल्ली/ केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार से जुड़ी अपनी प्रमुख योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने का निर्णय लिया है। अब यह योजना पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना के नाम से जानी जाएगी। सरकार ने इस फैसले के साथ योजना के तहत मिलने वाले रोजगार के दिनों की संख्या भी बढ़ा दी है।
सरकारी निर्णय के अनुसार अब ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी, जबकि पहले यह सीमा 100 दिन थी। सरकार का कहना है कि रोजगार के दिनों में यह बढ़ोतरी ग्रामीण परिवारों की आय में स्थिरता लाने और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है।
ग्रामीण विकास से जुड़ी यह योजना देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल है। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में अकुशल श्रमिकों को मजदूरी के बदले स्थानीय स्तर पर काम उपलब्ध कराया जाता है। सड़क, तालाब, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों के माध्यम से न केवल रोजगार मिलता है, बल्कि गांवों के विकास को भी गति मिलती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस योजना से करोड़ों ग्रामीण परिवार जुड़े हुए हैं। लाभार्थियों में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है, जिससे ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है। सरकार का दावा है कि काम के दिनों में बढ़ोतरी से महिलाओं और गरीब परिवारों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
मनरेगा योजना की शुरुआत वर्ष 2005 में की गई थी। बाद में इसे महात्मा गांधी के नाम पर जोड़ा गया। वर्तमान सरकार ने अब इसका नाम बदलते हुए इसे पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना का स्वरूप दिया है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव महात्मा गांधी के विचारों और ग्रामीण स्वावलंबन की भावना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।
सरकार के मुताबिक आने वाले समय में योजना के क्रियान्वयन से जुड़े दिशा-निर्देशों में भी आवश्यक संशोधन किए जाएंगे, ताकि बढ़े हुए रोजगार दिनों का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके। इस निर्णय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने और पलायन पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।













