नई दिल्ली, 26 नवंबर। देश आज संविधान दिवस मना रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों को संबोधित पत्र जारी कर संविधान की महत्ता, नागरिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक भागीदारी पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान ही वह शक्ति है जिसके कारण एक गरीब परिवार से आया साधारण व्यक्ति भी देश का प्रधानमंत्री बन सकता है।
प्रधानमंत्री ने लिखा कि संविधान ने न केवल उनके राजनीतिक जीवन का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि 24 वर्षों से लगातार उन्हें सरकार का मुखिया रहने का अवसर दिया। उन्होंने 2014 और 2019 में संसद भवन में प्रवेश के अपने भावुक अनुभव भी साझा किए।
मतदान को बताया नागरिकों का प्रमुख कर्तव्य
मोदी ने पत्र में कहा कि संविधान ने नागरिकों को मतदान का अधिकार दिया है, इसलिए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह मतदान का कोई भी अवसर न छोड़े। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूल और कॉलेज हर वर्ष 26 नवंबर को उन युवाओं का विशेष सम्मान करें जो पहली बार मतदाता बन रहे हैं। उनके अनुसार इससे युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जिम्मेदारी और गर्व का भाव विकसित होगा।
संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित संविधान सभा के सभी सदस्यों को याद किया। उन्होंने बताया कि 2010 में गुजरात में उनके नेतृत्व में ‘संविधान गौरव यात्रा’ निकाली गई थी, जिसमें संविधान की प्रतिकृति को हाथी पर रखकर यात्रा निकाली गई थी।
संविधान दिवस 2025 को बताया विशेष
मोदी ने कहा कि यह वर्ष कई ऐतिहासिक कारणों से विशेष है—
- सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती,
- वंदे मातरम् के 150 वर्ष,
- गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के 350 वर्ष।
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की प्रेरणा ने ही जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की समाप्ति का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे वहां भारतीय संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ।
कर्तव्यों को सर्वोपरि रखने की अपील
प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकार कर्तव्यों के पालन से ही प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 51A मौलिक कर्तव्यों को समर्पित है, जो देश की सामाजिक व आर्थिक प्रगति का आधार हैं।
उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखें। 2047 (आजादी के 100 वर्ष) और 2049 (संविधान के 100 वर्ष) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज लिए गए निर्णय आने वाली पीढ़ियों का भविष्य निर्धारित करेंगे।
युवा मतदाताओं के लिए संदेश
मोदी ने कहा कि प्रथम बार मतदान करने वाले युवाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और उन्हें यह अहसास कराया जाए कि वे अब केवल छात्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया के सक्रिय सहभागी हैं।
अंतिम आह्वान
प्रधानमंत्री ने कहा, “संविधान दिवस पर हम सब कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनने का संकल्प लें। यही भारत को विकसित और सशक्त बनाने का मार्ग है।”













